चंद्र ग्रहण का ब्लड मून क्या है ! खूनी चाँद का रहस्य

चंद्र ग्रहण का ब्लड मून क्या है?

चंद्र ग्रहण का ब्लड मून क्या है? सदियों से ही चन्द्रमा हम धरती वासियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रहा है ! हमारा कैलेंडर भी चन्द्रमा की साइकिल पर आधारित है ! अब मुझे ये बताने की जरुरत तो है नहीं कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कब और कैसे लगता हैं ! ये सब तो आप पहले से ही जानते हो ! मैं इस पोस्ट के माध्यम से आपको एसी जानकारी देना चाहता हूँ जो आप पूरी तरह से नहीं जानते हो ! और हाँ, ये पोस्ट उनके लिए तो बिल्कुल भी नहीं है जो मानते हैं कि चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण, राहू और केतू की वजह से होता है !अगर आप अन्धविश्वासों से दूर हटकर विज्ञान के नजरिये से इस पोस्ट को पड़ोगे तो आपको बहुत कुछ सीखने के लिए मिलेगा ! तो चलिए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण का ब्लड मून क्या है?

ये तो आप जानते ही होंगे कि जब चाँद पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य की ओर बढ़ता है तब चाँद का आकार धीरे-धीरे घटता जाता है ! जब चाँद सूर्य के सबसे पास होता है या यूँ कहें कि जब चाँद सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में होता है उस दिन चाँद पूरी तरह से दिखना बंद हो जाता है ! जिसको हम अमावस्या भी बोलते हैं ! पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए जब चाँद सूर्य से दूर जाने लगता है तब इसका आकार दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है !और जिस दिन चाँद सूर्य से अधिकतम दूरी पर होता है उस दिन हमें चाँद का पूरा भाग यानी पूरा चाँद दिखाई देता है जिसको हम पूर्णिमा भी बोलते हैं !

जिस तरह से पृथ्वी एक दीर्घवृत्ताकार पाथ पर सूर्य की परिक्रमा कर रही है और अपने पाथ पर साल में एक बार सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है ! तो एक बार न्यूनतम दूरी पर होती है ! उसी प्रकार चाँद भी पृथ्वी की परिक्रमा एक दीर्घवृत्ताकार पाथ पर कर रहा है ! जिसमें महीने में एक बार चाँद पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है तो एक बार न्यूनतम दूरी पर होता है !

चाँद का पाथ पृथ्वी के पाथ के साथ एक सीध में नहीं है बल्कि थोड़ा झुका हुआ है ! जब चाँद अपने पाथ पर पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है उसे हम सुपर मून कहते हैं ! लेकिन जरूरी नहीं कि जिस दिन सुपर मून हो उस दिन पूर्णमा भी हो ! अगर संयोगवश सुपर मून और पूर्णिमा एक साथ हो जाएँ तो इसे हम खगोलीय घटना बोलते हैं ! जो सालो में एक बार होती है !

सुपर मून वाले दिन पूरा चाँद साधारण से अधिक बढ़ा दिखाई देता है ! क्योकि उस दिन चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक नजदीक होता है ! और अगर संयोगवश जिस दिन सुपर मून और पूर्णिमा, दोनों एक साथ हों और उसी दिन चंद्रग्रहण भी है तो ये खगोलीय घटना और बढ़ी हो जाती है ! क्योंकि ऐसा कई दशकों में एक बार होता है ! 27 सितम्बर 2015 को ये खगोलीय घटना घटी थी जिस दिन सुपर मून और पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण तीनों एक साथ थे ! ऐसा माना जाता है कि ऐसी ही खगोलीय घटना अब 2033 में घटेगी !

चूँकि सूर्य पृथ्वी से कई गुना बड़ा है ! इस वजह से पृथ्वी की दो परछाई बनती हैं ! एक आउटर शैडो जिसको पेनुम्ब्रा बोला जाता है ! अंतरिक्ष में सूर्य का प्रकाश इस शैडो की डार्कनेस कम कर देता है ! और जब चाँद पेनुम्ब्रा शैडो से गुजरता है तब चंद्र ग्रहण की घटना घटती है !

लेकिन वो एरिया जहाँ पृथ्वी की शैडो सबसे अधिक डार्क होती है जहाँ सूर्य का प्रकाश पृथ्वी की शैडो की डार्कनेस को कम नहीं कर पता उस छोटे एरिया को अम्ब्रा बोला जाता है ! जैसे ही चाँद अम्ब्रा शैडो में प्रवेश करता है तो चाँद का तापमान अचानक 100 डिग्री सेल्सियस से -150 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है ! चाँद जैसे ही अम्ब्रा शैडो में प्रवेश करता है ! तब एक घटना घटती है जिसको हम ब्लड मून या रेड मून या खूनी चाँद भी बोलते हैं ! ये ग्रहण इस लिए खास होता है क्योकि ऐसी घटना कभी -कभी ही घटती है ! और अगर संयोगवश जिस दिन सुपर मून हो और उसी दिन ब्लूड मून वाला चंद्रग्रहण हो तो ये घटना खगोलीय द्रष्टि से और बढ़ी हो जाती है ! क्योंकि ऐसा संयोग सदियों में कभी-कभी होता है !

जिस समय चाँद अम्ब्रा शैडो के अन्दर होता है अगर उस समय चाँद से सूर्य को देखा जाये तो सूर्य पृथ्वी की वजह से पूरी तरह से ढंक जाता है ! आइये अब जानते हैं कि अम्ब्रा शैडो में चाँद लाल कैसे हो जाता है !

हम सूर्योदय और सूर्यास्व तो पृथ्वी का वायुमंडल कम तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश को फैला देता है ! अगर हम स्पेक्ट्रम को देखें तो रेड कलर की तरंग दैर्ध्य सबसे अधिक होता है ! अधिक तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश को पृथ्वी का वायुमंडल फैला नहीं पाता इस वजह से अधिक वेवलेंथ वाली लाइट चाँद से टकराती है और प्रतिबिंबित होकर हम तक पहुँचती है ! यही कारण है कि चाँद हमें लाल दिखाई देता है और सूर्योदय और सूर्यास्व के समय भी हमें सूर्य लाल दिखाई देता है, उसका भी यही कारण है !

मुझे उम्मीद है कि आपको ये पोस्ट चंद्र ग्रहण का ब्लड मून क्या है जरूर पसंद आई होगी !

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