चेतन मन और अवचेतन मन की शक्ति क्या है

चेतन मन और अवचेतन मन क्या है?

चेतन मन और अवचेतन मन क्या है? इन्सानी दिमाग दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार है ! अब आप कहोगे कि दिमाग को मेने शक्तिशाली हथियार ही क्यों बोला? तो इसका जवाब आपको इस पोस्ट के आखिर तक मिल जायेगा ! क्या आप जानते हो कि हमारा सबसे बड़ा दोस्त और सबसे बड़ा दुश्मन कौन है? जी हाँ, आप सही समझे, हमारा खुद का दिमाग ! हमारा दिमाग ही है ! जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हमें सफलता प्रदान करता है ! और हमारा दिमाग ही है जो आसान परिस्थितियों में भी हमें ऐसी उलझनो में डाल देता है कि हम जिंदगी भर उससे बाहर नहीं निकल पाते ! आइये इसको आसान भाषा में समझते हैं ! दिमाग की कमजोरी और शक्ति को समझाने के लिए में आपको एक कहानी सुनाता हूँ ! तो चलिए जानते हैं कि चेतन मन और अवचेतन मन क्या है?

एक बार दो भाई एक स्कूल में पढ़ने जाते थे ! दोनों भाई शारीरिक रूप से इतने मजबूत नहीं थे कि लड़ाई में वो किसी को भी मार पाएं लेकिन दोनों भाई अन्य विद्यार्थियों से ज्यादा बुद्धिमान थे ! एक दिन छोटे भाई का झगड़ा पाँच लोगो से हो गया ! लेकिन उसका बड़ा भाई भी क्या कर सकता था ! शारीरिक रूप से तो वो भी इतना मजबूत नहीं था कि पाँच लोगों से लड़ पाये ! जैसा कि मेने पहले ही बताया था कि वो दोनों भाई बलशाली तो नहीं थे, लेकिन बुद्धिमान थे ! ऐसी परिस्थिती में दोनों भाइयों ने सोच विचार कर एक युक्ति निकाली ! वो जानते थे कि शारीरिक बल के आधार पर हम इनसे नहीं जीत सकते इसलिए उन्होंने बुद्धि का प्रयोग किया और छोटे भाई ने बड़े भाई से कहा भईया याद है आज सुबह ही आपको एक शक्ती मिली है कि आज आप जिससे भी लड़ोगे उसकी आधी शक्ती आप अपने अंदर खींच लोगे और आप सामने वाले से ज्यादा शक्तिशाली हो जाओगे ! और ये शक्ति आपको सिर्फ आज शाम तक ही मिली है ! तो अब इन पाँचों लोगों को धूल चटा दो ! छोटे भाई का इतना कहना ही था कि उन पाँचो लोगों के पसीने छूटने लगे ! उनको डर लगने लगा कि कहीं इसकी बात सच हुई तो? और एसा सोच कर वो और ज्यादा डरने लगे ! जब बड़ा भाई उन पांचो के सामने आया तो वो पाँचो अपने आप को कमजोर महसूस करने लगे ! और उन्होंने बिना लड़े अपनी हर स्वीकार कर ली !

आखिर क्या कारण था कि पाँच बलवान लड़के एक कमजोर लड़के से हार गये ! आइये जानते हैं !

आप चेतन मन और अवचेतन मन के बारे में तो जानते ही होंगे हमारा चेतन मन दिमाग का सिर्फ लगभग 10% ही उपयोग करता है ! और इसी 10% में ये हमारे दिन भर के फैसले लेता हैं ! जैसे आज क्या खाना है? क्या पहनना है? कहाँ पर जाना है? किससे मिलना है? मै जो काम कर रहा हूँ वो सही है या गलत है? इस तरह के फैसले ! और बाकी का 90% हमारा अवचेतन मन उपयोग करता है ! हमारा अवचेतन मन वो फैसले लेता है जो हमारा चेतन मन नहीं लेता जैसे हमारी बॉडी का टेम्परेचर मैनेज करना ! दिल कई धड़कन और रक्तचाप को नियंत्रित करना ! ऐसे ही बहुत से काम जो हमारा अवचेतन मन नियंत्रित करता है !

आपने कई बार नोटिस किया होगा कि जब हम अचानक किसी बहुत बड़ी मुशीबत में फस जाते हैं तो एसा लगता है मानो दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है ! ये सच है कि जब भी हम अचानक किसी मुशीबत में फस जाते हैं तो हमारा चेतन मन काम करना बंद कर देता हैं और ऐसी स्थिती में हमारा अवचेतन मन हमें सम्भालता है ! और हमारे अंदर इतनी ऊर्जा और फुर्ती भर देता है कि हम उस पल में आये भयानक संकट से पल भर में बच जाते हैं ! और फिर हम बाद में बोलते हैं कि आज मेरा भाग्य अच्छा था जो में इतनी बड़ी विपत्ती से बच गया ! लेकिन सत्य तो ये है कि उस छोटे से पल में हमारा अवचेतन मन हमारे शरीर में इतनी ऊर्जा भर देता है कि हम उस संकट से बच पायें ! लेकिन बाद में हम इसको चमत्कार बोल देते हैं ! मेरे ख्याल से चेतन मन और अवचेतन मन के बारे में आप समझ चुके होंगे !

अब में पॉइंट पर आता हूँ ! हमारा चेतन मन सच और झूठ में अंतर जनता है ! लेकिन अवचेतन मन के लिर झूठ भी सच ही होता है ! जैसे आप कभी कोई डरावना सपना देखते हो तो आप बहुत बुरी तरह से डर जाते हो ! और जब आपकी नींद खुलती है तब आपके चेतन मन को पता चलता है कि वो एक सपना था ! लेकिन अवचेतन मन फिर भी यही सोचता है कि वो एक वास्तविक घटना थी ! इस वजह से आपके नींद से जागने के वाबजूद भी आपका डर पूरी तरह से नहीं जाता ! मेने आपको अभी एक कहानी सुनाई थी कि एक कमजोर लड़का पाँच बलवान लड़कों को हरा देता है ! दरअसल, इस कहानी में उस छोटे भाई ने उन पाँच लड़को के अवचेतन मन में ये बात भर दी थी कि उसके बड़े भाई को आज के लिए एक शक्ती मिली है ! कि वो जिससे भी लड़ेगा उसकी आधी शक्ति को अपने अंदर खींच लेगा ! जैसा कि मेने अभी आपको बताया था कि अवचेतन मन को झूठ भी सच ही लगता है ! तो उन पाँचो के अवचेतन मन ने इस बात को सुना और ये मान लिया कि आज के दिन हमारी आधी शक्ति उसके अंदर चली जाएगी और हम हार जायेंगे ! उन पाँचो के अवचेतन मन की सिर्फ इसी सोच ने उनके शरीर को भी कमजोर कर दिया और वो लड़ने से पहले ही हार गये !

इसी चीज को आप नकारात्मक सोच और सकारात्मक सोच भी बोल सकते हो ! जैसा कि हम कोई नया काम शुरू करते हैं और हमसे कोई बोले की इसमें सफलता नहीं मिलेगी ! दोस्तों मनो या ना मानो, हम उस काम में ज्यादातर असफल हो ही जाते हैं और फिर बाद में बोलते हैं कि उस बन्दे की नजर लग गई जो में सफल नहीं हुआ ! लेकिन सत्य तो ये था कि जब सामने वाला बन्दा बोलता है कि इसमें सफलता मिलने की संभावना है ! तो ऐसे में वो बात हमारे अवचेतन मन तक पहुँचती है ! और अवचेतन मन की शक्ती को तो आप जानते ही हो ! ये सच या झूठ में अंतर बिलकुल भी नहीं जनता ! तो ऐसी असफलताओं से कैसे बच जाये और कैसे अपने अवचेतन मन पर अपना काबू किया जाये?

मैं आपको बता दूँ कि अवचेतन मन पर नियंत्रण करना सम्भव है लेकिन आसान नहीं !अगर आपको किसी भी क्षेत्र में सफल होना है तो आपको दो चीजों का ध्यान रखना होगा, पहला तो ये कि आपको अपने अवचेतन मन को बेवकूफ बनाना होगा और दूसरा आपको बच्चा बनना होगा ! तो चलिए पहले सीधे पॉइंट पर बात करते हैं !

अवचेतन मन को बेवकूफ कैसे बनायें तो सबसे पहले एक बात ध्यान रखनी होगी मेहनत इतनी खामोसी से करो कि सफलता शोर मचा दे ! मतलब आप कोई नया काम शुरू करो या कर रहे हो तो उसके बारे में किसी से जिक्र मत करो, चाहे वो आपका घनिष्ट मित्र हो या कोई घर का सदस्य ! क्योंकि जब आप अपने काम के बारे में किसी को बताओगे ही नहीं तो आपके अवचेतन मन को कौन भ्रमित करेगा? आप जो कर रहे हो उसकी कल्पना अपने दिमाग में करते रहो कि आप उस काम में सफल हो चुके हो ! फिर देखना परिणाम ! आपका अवचेतन मन आपको असफल करने की बजाये सफलता प्रदान करने की ओर अग्रसर हो जायेगा ! और जब आप सफल होंगे तो ये दुनिया खुद ही देख लेगी कि आपने क्या कर दिखाया ! अगर आप अपने काम के बारे में किसी को नहीं बताओगे तो इसका फायदा ये हो कि आपके अवचेतन मन तक असफलता वाला शब्द कभी पहुंचेगा ही नहीं ! अगर आपको ये मजाक लग रहा है तो एक बार इसको आजमा कर जरूर देखें !

अब जानते हैं दूसरे पॉइंट को कि हमें बच्चा क्यों बनना हैं? याद कीजिये अपने बचपन को कि आप बचपन में ज्यादा खुश रहते थे या अभी ज्यादा खुश हो? पता है, हम बचपन में ज्यादा खुश क्यों रहते थे? क्योकि बचपन में हम सोचते कम थे और करते ज्यादा थे ! आपको जानकर हैरानी होगी कि एक जवान व्यक्ति के मन में एक दिन में 60 हजार से 80 हजार तक विचार आते रहते हैं ! जिनमे 90% विचार हमारे किसी काम के नहीं होते ! लेकिन जो बच्चे होते हैं उनके मन में विचार आने की क्षमता बहुत कम होती है ! इसलिए बच्चों को ना तो कल की याद सताती है और ना ही भविष्य से डर लगता है ! वो सिर्फ अपने वर्तमान को जीते हैं, वो भी खुशी पूर्वक !

आपको एक बात बता दूँ, हमारा जीवन ना बीते हुए कल में था और ना ही आने वाले कल में है, जीवन तो इसी छण में है जो चल रहा है ! और एक बात, हम अपने वर्तमान के इस छण को जैसे जियेंगे तो हमारा भविष्य भी वैसा ही होगा ! इसलिए ज्यादा सोचना बंद कीजिये और वर्तमान के इस पल का मजा लीजिये और सफलताओं के शिखर पर चढ़िये ! जैसा कि मेने सबसे पहले ही कहा था कि हमारा सबसे बड़ा दोस्त और सबसे बड़ा दुश्मन हमारा दिमाग ही है ! ये हमरे ऊपर निर्भर करता है कि हमें अपने दिमाग को अपना दुश्मन बनाकर अपना पतन करना है या दोस्त बनाकर दुनिया पर राज करना है !

अब आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि अपने विचारों को कैसे कंट्रोल किया जाये तो ये एक अलग विषय है जिसको हम आगे में जानेंगे !

मुझे उम्मीद है कि आपको ये पोस्ट चेतन मन और अवचेतन मन क्या है पसंद आई होगी !

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