जमीन के अंदर का पानी सर्दियों में गर्म क्यों होता हैं

प्रकृति भी अजीब है जो हमें अलग-अलग ऋतुओं में अलग और नये नये अनुभव कराती है ! अगर बात करें सर्दियों की तो ऐसा लगता है कि मानो घर में जितने कपड़ें हैं उन सबको पहनलो और जैसे ही गर्मी आती हैं तो तन पर एक कपडा भी मनो गर्मी से बेहाल कर रहा हो ! कितनी अजीब है हमारी प्रकृति? लेकिन इन्ही सब बातो की बीच क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन के अंदर का पानी गर्मियों में ठण्डा और सर्दिया में गर्म क्यों निकलता है? जमीन के अंदर का पानी का तापमान ऋतुओं के अनुसार क्यों नहीं बल्कि इसके विपरीत ही क्यों होता है? आखिर क्या है इसके पीछे का विज्ञान आइये जानते हैं !

दरअसल सत्य तो ये कि जमीन के अंदर पानी का तापमान हमेशा एक समान ही रहता है अब चाहे सर्दी हो या गर्मी, जमीन के अंदर का पानी का ठण्डे या गरम होने का अनुभव सिर्फ हमें बहरी वातावरण की वजह से ही होता है ! आइये इसको समझते है !

दरअशल ग्राउंड वाटर का तापमान हमेशा लगभग 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक ही रहता है चाहे पृथ्वी की सतह पर सर्दी हो या गर्मी लेकिन ग्राउंड वाटर हमेशा 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक ही रहता है ! जब गर्मियों का मौसम होता है उस समय पृथ्वी की सतह पर तापमान लगभग 35 से 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है ! ऐसी गर्मी में जब हम जमीन से पानी निकालते हैं तो उसका तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियकि तक ही होता है ! चूँकि हम 35 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान से जूझ रहे होते हैं ऐसे में 15 से 20 डिग्री सेल्सियस वाला पानी हमें ठण्डा महसूस होता है और हमें भीषण गर्मी से शांति देता है !

वहीं इसके विपरीत जब सर्दियों का मौसम आता है तो पृथ्वी की सतह का तापमान लगभग 0 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है ! सब कुछ जमा देने वाली इतनी सर्दी में जब हम जमीन के अंदर का पानी को छूते हैं तो जमीन के अंदर का पानी का तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस होने की वजह से वो हमें पृथ्वी की सतह के वातावरण की अपेक्षा गर्म महसूस होता है ! इसी वजह से भीषण सर्दी में भी हमें ग्राउंड वाटर से नहाना सुखदाई लगता है !

दरअसल पृथ्वी की सतह का तापमान में अंतर ही हमें जमीन के अंदर का पानी का ठण्डा या गर्म होने का अनुभव कराता है !

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