क्या पृथ्वी अंदर से खोखली है जानिये होलो अर्थ का सच

क्या आपने कभी सोचा हैं कि क्या होता अगर पृथ्वी अंदर से खोखली होती? अगर आपने होलिबुड की एक मूवी Juerney To Centre Of The Earth को देखा है तो उसमे दिखाया है कि पृथ्वी के अंदर एक और दुनिया मौजूद है जो कि हमारी दुनिया की तरही है ! प्राचीन काल में लोग होलो अर्थ थ्योरी पर ज्यादा विश्वास करते थे ! हालांकि कुछ लोग अब भी हैं जो होलो अर्थ थ्योरी पर विश्वाश करते हैं और उनका मानना है कि पृथ्वी अंदर से खोखली है !

होलो अर्थ का जिक्र कई पौराणिक कथाओं में किया गया है ! तिब्बेतियन बौद्ध धर्म में एक प्राचीन शहर सम्भाला का जिक्र किया गया है, तिब्बेतियन बौद्ध धर्म के अनुसार सम्भाला शहर पृथ्वी के अंदर मौजूद है ! केल्टिक पौराणिक कथा के अनुसार पृथ्वी के अंदर एक गुफा है जिसका नाम आयरलैंडस गेट टू हेल है ! हिन्दू धर्म में भी होलो अर्थ का जिक्र किया गया है जिसमे पृथ्वी के अंदर मौजूद स्थान को पाताल लोक बोला गया है ! हिन्दू ग्रन्थ रामायण में जिक्र किया गया है कि एक बार पाताल लोक का राजा अहिरावन, राम और लक्ष्मण को पाताल में ले गया था बाद में हनुमान जी ने राम और लक्ष्मण को अहिरावन से मुक्त कराया ! अमेरिकन मैथलॉजी के अनुसार ग्रांड केनियन अंडर वर्ल्ड में जाने का एक रास्ता है !

1692 में एड्मुंड हॉली ने होलो अर्थ का एक ढांचा डिजाइन किया एड्मुंड हॉली ने अपनी थ्योरी में बताया पृथ्वी के अंदर एक श्रेणी की तरह कई सेल्स मौजूद हैं ! जैसे हम पृथ्वी के ऊपर है और हमारे आस पास एक वायुमंडल है उसी तरह पृथ्वी के अंदर भी एक पृथ्वी है और वहा पर भी हमारी तरह ही एक दुनिया है और पृथ्वी के अंदर मौजूद पृथ्वी के अंदर भी एक दुनिया है और ये एक चैन कि तरह है कि एक के बाद एक दुनिया !

खैर, अगर ये सब बातें सच है कि पृथ्वी अंदर से खोखली है तो ये फिजिक्स के लिए एक बहुत बड़ी चिनौती है क्योंकि अगर हम विज्ञान की द्रष्टि से होलो अर्थ थ्योरी को देखें तो कुछ और ही होगा ! तो चलिए होलो अर्थ थ्योरी पर विज्ञान की तरफ से एक नजर डालते हैं !

अगर विज्ञान की नजरों से देखें तो होलो अर्थ के दो सिनेरियो को ध्यान में रख कर बात करनी होगी ! पहला तो ये की पृथ्वी का द्रव्यमान वही हो जो मौजूदा अर्थ का है और दूसरा सिनेरियों है कि पृथ्वी की डेन्सिटी यानी की घनत्व वही हो जो मौजूदा अर्थ का है ! तो चलिए इन दोनों सिनेरियों पर मजेदार परिक्रमा करते हैं !

पहला सिनेरियो, मान लो की पृथ्वी कुछ किलोमीटर की गहराई के बाद खोखली है ! अगर ऐसा है तो आइये देखते है कि हमारे दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? सबसे महत्व पूर्ण बात है पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल जोकि मौजूदा अर्थ का 9.8 मीटर/सेकेंड-सेकेंड ! अगर हम अपनी परिकल्पना में पृथ्वी को समान गुरुत्वाकर्षण बल के साथ खोखली मानते हैं तो खाखोली पृथ्वी का द्रव्यमान भी वही होना चाहिए जो हमारी मौजूद अर्थ का है ! क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल का मान पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है ! अगर किसी भी ग्रह का द्रव्यमान कम होगा ! तो उसकी ग्रेविटी भी कम होगी ! और अगर द्रव्यमान ज्यादा होगा तो ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण बल भी ज्यादा होगा !

अगर हमारी काल्पनिक खोखली अर्थ की ग्रेविटी वही है जो हमारी मौजूद अर्थ की है तो काल्पनिक खोखली अर्थ का मास यानी द्रव्यमान भी वही होगा जो हमारी मौजूद अर्थ का है ! अगर काल्पनिक अर्थ का द्रव्यमान मौजूदा अर्थ के बराबर रखना है तो हमें काल्पनिक खोखली अर्थ की डेंसिटी को बढ़ाना होगा ! क्योंकि किसी भी चीज का द्रव्यमान उसकी डेंसिटी पर निर्भर करता है ना कि उसके आकार पर ! जैसे कि 1 किलोग्राम लोहे का आकार 1 किलोग्राम रुई से कम होगा क्योंकि यहाँ रुई की अपेक्षा लोहे की डेन्सिटी ज्यादा है ! उसी तरह खोखली अर्थ का आकार और मास सामान रखना है तो उसकी डेंसिटी बढ़ानी होगी !

अगर ऐसा होता है तो पृथ्वी और ज्यादा ठोस हो जाएगी ! इतनी ठोस कि जैसे मानो पृथ्वी कि सतह किसी ठोस धातु की बानी हो ! क्योंकि जिस चीज का घनत्व ज्यादा होता है तो वो उतनी ही ठोस होती है जैसे लोहे की डेंसिटी पत्थरो से ज्यादा होती है ! इसी वजह से लोहा पत्थर से ज्यादा ठोस है इसी प्रकार हमारी खोखली अर्थ की डेंसिटी ज्यादा होने की वजह से पृथ्वी की सतह एक ठोस धातु के समान होती ! अगर ऐसा होता तो पृथ्वी पर जीवन सम्भव नहीं हो पाता क्योंकि धातु की तरह ठोस सतह पर नातो कोई पेड़ उगता और नाही किसी भी प्रकार की खेती सम्भव थी !

हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन पेड़ पौधों की वजह से ही है क्योंकि पेड़ सूर्य के प्रकाश को प्रकाश प्रकाश संश्लेषण के द्वारा ऑक्सीजन में बदलते हैं ! अगर पृथ्वी की सतह ठोस होती तो इस पर पेड़ पौधों के ना होने की वजह से ऑक्सीजन भी नहीं होती ! ना ही पृथ्वी पर कोई वायुमंडल होता और ना ही पृथ्वी पर किसी भी प्रकार का जीवन पनप पाता !

अगर एक परिस्थिति में ये भी मान लें कि खोखली अर्थ की ठोस सतह पर पेड़ पौधे भी हैं ! और इसके चरों ओर वायुमंडल भी है और खोखली अर्थ पर जीवन भी है ! तो भी पृथ्वी पर मौजूद वायुमंडल और जीवन एक पल में ही नष्ट हो जाता क्योंकि हम सभी जानते हैं की पृथ्वी के चरों ओर एक अदृश्य चुम्ब्कीय क्षेत्र यानी मेग्नेटिक फील्ड मौजूद जो पृथ्वी की रक्षा सौर तूफानों से कर रहा है !

अगर पृथ्वी के चारो ओर इसका मेग्नेटिक फील्ड नहीं होता तो सौर हवाऐं पृथ्वी पर सब कुछ जला देतीं ! हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी की गहराई में हाई डेंसिटी में मेल्टिक कोर मौजूद है ! जिसकी वजह से पृथ्वी के चरों ओर अदृश्य और मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र मौजूद है ! अगर पृथ्वी खोखली होती तो इसकी कोर भी नहीं होती और ना ही इसका कोई चुम्बकीय क्षेत्र होता इस वजह से खोखली अर्थ पर एक पल में ही सब कुछ जल चुका होता !

अब आइये दूसर सिनेरिओ पर नजर डालते हैं ! मान लो पृथ्वी अंदर से खोखली है ! खोखली पृथ्वी की डेंसिटी वही है ! जो मौजूदा अर्थ की है ! इस परिस्थिति में खोखली पृथ्वी का मास कम हो जाता जिसकी वजह के इसकी ग्रेविटी बहुत कम होती इतनी कम कि इस पर वायुमंडल का बनना नामुमकिन था ! क्योंकि पृथ्वी पर वायुमंडल इसकी ग्रेविटी की वजह से ही है ! अगर खोखली अर्थ पर वायुमंडल ही ना होता तो इस पर जीवन का पनपना तो असम्भव ही था !

और हाँ, पृथ्वी समान डेंसिटी के साथ खोखली होती तो ग्रेविटी पृथ्वी की सतह को इसके केंद्र की ओर खींचती और पृथ्वी का कम डेंसिटी की वजह से ठोस ना होने के कारण पृथ्वी टूट फूट कर ब्लास्ट हो चुकी होती ! जो लोग होलो अर्थ पर अभी भी विश्वास करते हैं तो सॉरी दोस्तों, विज्ञान इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता ! अब मैं आपसे पूछता हूँ कि होलो अर्थ हाइपोथिसिस पर आपके क्या विचार हैं ! प्लीज कमेंट बॉक्स में जरूर बताना !

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