बृहस्पति ग्रह के बारे में जानकारी | Jupiter Planet in Hindi

बृहस्पति ग्रह ( Jupiter Planet )

यूँ तो हमारे ब्रह्माण्ड में अनेक ग्रह और तारे हैं और उन ग्रह और तारों में प्रत्येक की कुछ अपनी-अपनी विशेषताए हैं जो उन्हें अपने आप में विशेष और आकर्षक बनती हैं ! ब्रह्माण्ड में उपस्थित इन ग्रहों की रहस्यमई और रोचक घटनाओं से विज्ञान जगत काफी उत्साहित रहता है जो समय के साथ परिस्थितियों को बदलती रहती है ! इस एपिसोड में हम ऐसे ही एक रहस्यमई ग्रह बृहस्पति के बारे में जानेंगे और ये भी समझेंगे कि बृहस्पति ग्रह के किन गुणों के कारण वैज्ञानिकों को यह लगता है कि वह एक तारा है जो प्रज्वलित नहीं हुआ है जो वैज्ञानिकों के लिए काफी रोचक विषय बना हुआ है !

यह ग्रह प्राचीन काल से ही खगोलविदों द्वारा जाना जाता रहा है तथा यह अनेक संस्कृतियों की पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ था और सनातन संस्कृत से आज भी जुड़ा हुआ है ! रोमन सभ्यता ने अपने देवता जुपिटर के नाम पर इसका नाम रखा था ! चीनी, कोरियाई और जापानियों ने इस ग्रह को एक तारे के जैसा बताया है ! दोस्तों यह बात वैज्ञानिक तौर पर कितनी सही है यह हम आगे जानेगे !

खगोल विज्ञान के अनुसार बृहस्पति सूर्य से पांचवा और हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है ! यदि हम पृथ्वी को बृहस्पति की सतह पर रखें तो वह थाली में रखे एक रूपया के सिक्के जितनी दिखाई पड़ेगी ! बृहस्पति का भार अन्य आठ ग्रहो के मिले जुले भार के दो गुना से भी ज्यादा है ! बृहस्पति न केवल सबसे बड़ा ग्रह है बल्कि सबसे सक्रीय भी है ! यह अनेक रहस्यों और चौंका देने वाली घटनाओ से भरा पड़ा है ! बृहस्पति प्राथमिक तौर पर गैस और तरल पदार्थो से बना हुआ हैं ! यह एक चौथाई हीलियम द्रव्यमान के साथ मुख्यरूप से हाइड्रोजन से बना हुआ है ! इसके सबसे ऊंचे बादल जमी हुई अमोनिया गैस के बने हुए हैं जिनका तापमान लगभग -140 डिग्री सेल्सियस है !

यह एक उग्र अशांत वायुमंडल से ढका हुआ है जो हाइड्रोजन और हीलियम से बना है ! और जिसमे अमोनिया और मीथेन गैस की भी काफी मात्रा है ! यह वायुमंडल हजारों किलो मीटर की गहराई तक फैला हुआ है ! धीरे धीरे अत्यधिक दवाव और तापमान के कारण ये गैस द्रव में बदल जाती हैं और इस कारण खगोल शात्रियों का यह मानना है कि इस ग्रह की सबसे अंदरूनी सतह द्रव हाइड्रोजन की बनी है ! बृहस्पति के केंद्र में एक छोटी सी चट्टानों की कोर है जहां तापमान लगभग 2000 डिग्री सेल्सियस हो सकता है ! जो सूर्य की सतह के तापमान से लगभग 3 गुना अधिक है ! इस कोर मै लोहा, सिलिकन और अन्य भारी तत्व हो सकते हैं !

इसके बाहरी वातावरण में विभिन्न अक्षांशों पर कई पथक द्रश्य पट्टियाँ नजर आती हैं जो अपनी सीमाओं के साथ भिन्न भिन्न वातावरण के परिणाम स्वरूप बनती हैं ! बृहस्पति का घूर्णन सौर मंडल के सभी ग्रहो में सबसे तेज है ! यह अपने अक्ष पर एक घूर्णन10 घण्टे से भी कम समय में पूरा कर लेता है ! इसके तेज घूर्णन के कारण इसका आकार चपटा और उपगोल है ! यह ग्रह एक शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र और एक धुंधले ग्रहीय प्रणाली से घिरा हुआ है और वैज्ञानिकों का दावा है कि इसकी वजह बृहस्पति के अंदर उपस्थित द्रव हाइड्रोजन है !

बृहस्पति की सतह की सबसे अधिक अनोखी विशेषता है एक बहुत बड़ा लाल धब्बा ! यह धब्बा एक लम्बा अण्डाकार क्षेत्र है जो इतना बड़ा है कि इसमें बराबर से रखी हुई दो पृथ्वियाँ समां सकती हैं ! कभी कभी इस धब्बे का रंग हल्का गुलाबी हो जाता है और कभी भड़कीला नारंगी लाल हो जाता है ! रंगो में यह बदलाव सूर्य के पराबैंगनी प्रकाश के कारण होता है ! इस लाल धब्बे को खगोल वैज्ञानिक काफी समय तक नहीं समझ पाए ! अंतरिक्ष में भेजे गए पॉयनियर और वॉयजर अंतरिक्ष यानों से पता चला कि यह लाल धब्बा वास्तव में उसके वायुमंडल में चल रहा भीषड़ बवंडर है !

वैज्ञानिकों ने बृहस्पति ग्रह पर जीवन का भी विचार किया परन्तु यह ज्यादा लम्बे समय तक नहीं टिक पाया क्योंकि अमोनिया के बादलों से घिरा तीव्र रेडियो तरंगे प्रसारित करता भीषड़ बवंडर वाला यह ग्रह बृहस्पति जिसके उपग्रह आग या बर्फ के बने हैं, ऐसा ग्रह है जहां जीवन की खोज करना ही व्यर्थ है ! बृहस्पति का अक्षीय झुकाव 30 डिग्री होने से पृथ्वी और मंगल जैसे महत्वपूर्ण मौसमी परिवर्तन का भी इस ग्रह को कोई अनुभव नहीं है ! फिर भी कुछ बातों में आज के बृहस्पति की परिस्थितियाँ उन परिस्थितियों से भिन्न नहीं है जिनमे आज से चार अरब साल पहले पृथ्वी पर जीवन का उदय हुआ था ! जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक समझे जाने वाले यौगिक जैसे पानी, अमोनिया और मैथेन बृहस्पति के वायुमंडल में मौजूद हैं ! बृहस्पति के बादलों में लगातार बिजली चमकती रहती है ! अगर बृहस्पति पर थोड़े भी कार्बनिक अणु मिले तो इस बात को बल मिलेगा कि जीवन ब्रह्माण्ड में घटने वाली शायद एक घटना मात्र है ! बृहस्पति पर जीवन केवल एक कोरी कल्पना मात्र है क्योंकि बृहस्पति की कुछ विशेषताएं जीवन के लिए बिलकुल विपरीत हैं !

बृहस्पति ग्रह की इन रहस्यमई घटनाओं से इस बात को बल मिलता है कि बृहस्पति जो वास्तव में गैस और द्रव का बना तेजी से घूमने वाला गोला है इसकी संरचना, आकार, गैस और द्रवों का बना वातावरण और उपग्रहों की संख्या से ऐसा लगता है कि यह एक तारा हैं जिसमे अपनी ऊर्जा पैदा करने की क्षमता नहीं है ! वैज्ञानिको के मत के अनुसार यदि बृहस्पति सिर्फ दस गुना ज्यादा भारी होता तो वह सूर्य के सामान अपनी ऊर्जा स्वयं पैदा करने लगता ! क्योंकि बृहस्पति के वायुमंडल मैं भरी अक्रिय गैसों की प्रचुरता सूर्य से लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा है ! और हैरानी की बात यह है कि बृहस्पति संरचना की द्रष्टि से भी अन्य ग्रहो जैसा नहीं है बल्कि यह सूर्य जैसा अधिक मालूम पड़ता है !

अगर भविष्य में ऐसी कोई घटना घटती है जब बृहस्पति अपनी ऊर्जा स्वयं पैदा करने लगे तो फिर यह सूर्य के बाद दूसरा ऊर्जा का स्त्रोत बन सकता है ! बृहस्पति की वर्तमान परिस्थितियों पर अगर गौर करें तो यह मालूम पड़ता है कि यह एक ग्रह नहीं बल्कि तारा है ! हालांकि इस बात की ठोस पुष्टि वैज्ञानिको की ओर से अभी नहीं है !

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